
वाराणसी का कुख्यात कोडीन कफ सिरप काला कारोबार अब पूरी तरह एक्सपोज़ हो चुका है। करोड़ों रुपये के इस रैकेट का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल बताया जा रहा है, जिसने फर्जी फर्मों और कोरे कागज़ों की मदद से पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। कफ सिरप की असली बिक्री दुकानों पर नहीं, बल्कि इंटरनेशनल ब्लैक मार्केट में होती थी—सीधे बांग्लादेश तक!
कैसे चलता था “कागज़ी व्यापार”?
तफ्तीश में सामने आया कि रांची के शैली ट्रेडर्स से कोडीन युक्त कफ सिरप की खरीद-फरोख्त केवल कागज़ पर होती थी। वाराणसी, जौनपुर, कानपुर, लखनऊ समेत UP के कई जिलों की फर्जी/अनट्रेस्ड फर्मों के नाम पर भारी मात्रा में सिरप दिखाया जाता था।
शुभम जायसवाल हर फर्म को 10 रुपये प्रति शीशी की दर से कमीशन देता था। असल में ये सिरप स्थानीय दुकानों तक पहुंचता ही नहीं था—इन्हें इंटरनेशनल रूट से बाहर भेजा जाता था। इस तरह हजारों-लाखों बोतलें बिना किसी रिटेल रिकॉर्ड के सीधे सीमा पार तस्करी कर दी जाती थीं।
सफेदपोश, केमिस्ट और अफसर—सबका हिस्सा तय!
सूत्रों के मुताबिक शुभम के नेटवर्क में कई सफेदपोश चेहरे, केमिस्ट एसोसिएशन के बड़े पदाधिकारी, यहाँ तक कि कुछ अधिकारी भी शामिल थे।
हर बोतल पर फिक्स कमीशन तय था—सप्लाई चेन के हर शख्स का हिस्सा पक्का!
फर्मों पर NDPS Act में मुकदमा
जांच के बाद FSSAI और ड्रग विभाग ने जिन फर्मों पर केस दर्ज किए, उनमें शामिल हैं:

- वाराणसी: 28 फर्में
- जौनपुर: 12 फर्में
- कानपुर: 8 फर्में
- लखनऊ: 3 फर्में
इनमें से किसी के पास कफ सिरप की बिक्री का रिकॉर्ड नहीं मिला, जो सीधा NDPS उल्लंघन है।
STF की दबिश, शुभम का करीबी अमित गिरफ्तार
इस रैकेट की परतें तब और खुलने लगीं जब यूपी STF ने अमित सिंह टाटा को गिरफ्तार किया।
अमित शुभम का खास भरोसेमंद बताया जा रहा है। उसके फर्म पर भी भारी मात्रा में कागज़ी खरीद-बिक्री दर्ज मिली। अब SIT कई फाइलों, बैंक डिटेल्स और फोन रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है।
संभावना है—अगले दिनों में और बड़े नाम सामने आएंगे।
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